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शनिवार, 20 मार्च 2021

नक्षत्र अनुसार ज्योतिष पाया जानना

                                          नक्षत्र अनुसार पाया जानना

नक्षत्र अनुसार ज्योतिष पाया जानना
नक्षत्र अनुसार ज्योतिष पाया जानना




हम सभी ज्योतिष के अनुसार अपनी कुंडली देखते हैं, बहुत ही कम लोग यह जानने के लिए उत्सुक्त होते हैं कि हमारा पाया कौन सा है।  
आज मैं आप के साथ यही जानकारी शेयर करना चाहता हूँ।  

ज्योतिष अनुसार पाया 4 प्रकार के होते है जिन को हम नक्षत्र अनुसार जान सकते हैं। 
1  सोने का पाया 
2 चांदी का पाया
3 लोहे का पाया 
4 ताम्बे का पाया

चांदी का पाया
आद्र, पुनर्बसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्व फागुनी, उत्तरा फागुनी, हस्त, चित्र, स्वाति इन नक्षत्रों मे जातक का जन्म हो तो चांदी का पाया होते है।  

सुवर्ण का पाया
रेवती, अश्वनी, भरनी, कृतिका, रोहणी, मृगशिरा इन नक्षत्रों मे जन्म हो तो सुवर्ण का पाया होता है।  

ताम्बे का पाया
विशिखा,  अनुराधा, जेष्ठा, मूल, पूर्वषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा के मध्य को ताम्बे का पाया कहलाता है।  

लोहे का पाया
पूर्व भद्रापद, उत्तरा भाद्रपद में जन्मे जातक लोहे का पाया कहलाता है।  

चांदी और लोहे का पाया ज्योतिष अनुसार शुभ था श्रेष्ठ माना जाता है।
ताम्बे का पाया भी ठीक माना जाता है।  



  


  




          

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

बसंत पंचमी सरस्वती पूजा

                                        
Saraswati Pooja
माँ सरस्वती


बसंत पंचमी मंगलवार 16 फरवरी 2021 

मंगलवार 16 फरवरी 2021


इस बार यह त्योहार 16 फरवरी 2021 मंगलवार को है।

इस त्योहार को देवता और मानव सब हर्ष और उल्लास के साथ मनाते है।  एक पोराणिक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा ने इस संसार की रचना रची और अपने करमंडल से जल छिड़का  तो माँ सरस्वती प्रकट हुई, माँ के हाथो में वीणा, पुस्तक, माला और हाथ वरदान के मुद्रा में सजे हुए थे। माँ ने जब अपने सुन्दर हाथो से वीणा के तारो छेड़ा तो इस संसार में स्वर के उतपत्ति हुई। इसलिए माँ का नाम सरस्वती पड़ा।  यह दिन वसंत पंचमी का दिन था, तभी से इस संसार में माता सरस्वती के पूजा होती है। 

यह दिन बसंत पंचमी के नाम से भी मनाया जाता है  यह हिन्दुओ का बहुत महत्वपूर्ण त्योहार है। माँ सरस्वती की, पूजा का यह त्योहार हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।  इस दिन माँ सरस्वती की पूजा करने से विद्या और बुद्धि का पूर्ण आशीर्वाद मिलता है।  इस दिन किसी भी नए काम को करने के लिए शुभ माना जाता है। 

विद्यार्थी इस त्योहार को बड़ी ही उत्सुकता के साथ मनाते हैं।  

बहुत से स्कूलों में इस दिन माँ सरस्वती की पूजा होती हैं, और बच्चे रंगा रंग प्रोग्राम प्रस्तुत करते हैं, और माँ सरवती को प्रसन्न कर के, माँ सरस्वती का आशीर्वाद लेते हैं।

माँ सरस्वती को पीले फूल बहुत पसंद हैं, हम सब को पीले पूल माँ को अर्पण कर माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

इस दिन पीले कपडे पहने जाते हैं। पीले फूल, पीली मिठाई, हल्दी का तिलक लगाया जाता है। 

माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए वाद्य यन्त्र, किताबे, कलम दवात, माँ के समक्ष रख कर, पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। 

इस बार यह त्योहार 16 फरवरी 2021 मंगलवार को है।


 

 





शुक्रवार, 22 जनवरी 2021

पुखराज : किन के लिए शुभ है यह रत्न, फायदे, नुकसान, उपरत्न

पुखराज Topaz 
पुखराज Topaz
पुखराज Topaz



सबसे बढ़िया पुखराज 

पीत पुखराज सब से अच्छा होता है 
पुखराज एक बहुमूल्य रत्न है, इस का सम्बन्ध बृहस्पति गृह से है पुखराज को संस्कृत मै पुष्पराग भी कहा जाता है।
पुखराज भारी होता है 
पुखराज पीला होता है 

पुखराज के फायदे

ज्योतिष अनुसार पुखराज गुरु का रत्न माना जाता है, यह देखने मै सुन्दर चमकदार और पीला होता है ।  गुरु ग्रह से ज्ञान, धन, मान, सम्मान, विवाह, संतान सुख की प्राप्ति होती है 
जिस की कुंडली मै गुरु कमजोर हो उसे पुकराज पहनने की सलाह दी जाती है।  पुखराज राजाओ का रत्न है।  इसको धारण करने से जीवन मै बाधाओ छुटकारा मिलता है और जातक जीवन मै तरक्की की राह पर निकल जाता है।  

यह एक महंगा रत्न है यह पर दर्शी और चमक दार होना चाइये।  
पुखराज को गोबर पर रगड़ने पर इसकी चमक बढ़ जाती है 
पीत पुखराज सब से अच्छा होता है 

पुखराज के नुकसान 

पुखराज  पन्ना और हीरा एक साथ नहीं पहन्ना चाहिए 
पुखराज  जाले वाला नहीं पहन्ना चाइये 
पुखराज  टूटा नहीं होना चाइये 
पुखराज  दो रंग वाला नहीं पहन्ना चाइये 
पुखराज चीरे वाला नहीं पहन्ना चाइये
पुखराज दानेदार परतदार नहीं लेना चहिये 

 पुकराज के उपरत्न 

केरु - इस का रंग पीतल के समान होता है 
सुनहला - सफेद और पीला होता है 
टाइगर स्टोन


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रविवार, 20 दिसंबर 2020

साल 2021 मास पूर्णिमा और मास अमावस्या

                       साल 2021 मास पूर्णिमा और मास अमावस्या 

साल 2021 मास पूर्णिमा और मास अमावस्या

 साल 2021 मास पूर्णिमा और मास अमावस्या




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* ज़िंदगी 





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मंगलवार, 10 नवंबर 2020

धनतेरस 2020 : कब है धनतेरस का मुहूर्त ? जाने शुभ मुहूर्त

कब मनाया जाता है
धनतेरस को धन्वंतरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस प्रतिवर्ष कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।

क्यों मनाते हैं धनतेरस
ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरी अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। भगवान धनवंतरी की पूजा से आरोग्यता की प्राप्ति होती है।

धनतेरस 2020
इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर शनिवार को मनाया जाएगा।

धनतेरस 2020 पूजा का शुभ मुहूर्त
शाम 5:28 से लेकर 5: 59 तक का समय पूजा के लिए शुभ है। इस समय काल के दौरान भगवान धन्वंतरि की पूजा की जा सकती है।

धनतेरस के दिन खरीदारी
इस दिन वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। लोग इस दिन सोना-चांदी, सोने के सिक्के, बर्तन, गहने, आदि खरीदते हैं।

क्या ना खरीदे
इस दिन काले रंग की चीजें, कांच का सामान तथा लोहे से बनी चीजें नहीं खरीदनी चाहिए।

धनतेरस 13 नवंबर को खरीदारी का मुहूर्त
सुबह 5:5 9 से 10:06 बजे
सुबह 11:08 से दोपहर 12:51 बजे
दोपहर 3:38 से शाम 5:00 बजे

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रविवार, 18 अक्तूबर 2020

Om Rudra Rudraksha

Om Rudra Rudraksha

                                 Om Rudra Rudraksha real Benefits for all 

Om Rudra Rudraksha real Benefits for all
Om Rudra How to get real Benefits of Rudraksha 



    The importance of Rudraksha is incomplete without Shiv Purana. 
There is complete information about the significance of Rudraksha in Shivpurana. The information which is written in Shivmahapuran, I am writing here for all of you with the blessings of Lord Shiva.
         Rudraksha is such a fruit, which is always on earth for human welfare. The person wearing Rudraksh always gets the blessings of Lord Shiva. The knowledge of Rudraksha is priceless, Rudraksha always has its own importance in human life.
         Rudraksha is very dear to Lord Shiva. Rudraksha has been called His Holiness. With the philosophy of Rudraksha and chanting on the rosary of Rudraksha, all sins are removed, evil spirits can no longer harm in presence of Rudraksha. God is pleased with Rudrakshadhari. Rudraksha provides salvation.
         In the past, God Shiva has described the glory of Rudraksh in a story to Goddess Parvati in order to benefit all people. Lord Shiva has said to Goddess Parvati, it is a thing of the past, I have been doing a terrible penance for thousands of years, one day when I opened my eyes, at that time some drops of water fell on the earth and from those drops The tree named Rudraksha was born on the earth.

         I distributed those Rudraksh to Vishnu devotees. On the ground, Mathura, Ayodhya, Lanka, Kashi, and many other places of Rudraksha were grown. Shiva devotees must wear Rudraksha. Amla shaped Rudraksha falls in the best category. Rudraksha comes in the middle category, like the fruit of hatred. Small Rudraksh granule which is equal to gram grains. He also gives good fruits and good fortune in all the three worlds.

The one who is equal to the fruit of Rudraksh Amla is the one who destroys all the sufferings and the one who is very small like the Gunja fruit, is also the one who fulfills all the desires and gives the perfection. Chhota Rudraksha is also more fruitful. Therefore, Rudraksh must be worn, Rudraksha is auspicious, smooth to look at, strong with strong thorns, beautiful Rudraksha, enjoyment, and salvation. Rudraksha which is bad, such as - Worms, broken, is not round, it should not be worn. The Rudraksha in which Dora has a threadable hole on its own is the best.

Rudakadhari wearers should abandon garlic, onion in his diet.

Rudraksha type and Dharana mantra: -

1. Ek Mukhi Rudraksha                 One Face Rudraksha 

Mantra: = OM Hrim Namah

God is the form of Lord Shiva, it is offered to bhoga and moksha, where One Faced Rudraksha is worshiped. The place of Lakshmi is definitely there. There, all the disturbances are destroyed, and all the wishes are fulfilled.

2. Doomukhi Rudraksha            Two Face Rudraksha 

Mantra: = Om Namah              Two Face Rudraksha 
Two-Faced Rudraksha is considered as Deveshwar.
It fulfills all desires and gives full results.

3. Teenmukhi Rudraksha               Three Face Rudraksha 
Three Faced Rudraksha
Mantra: = ॐ Klin Namah
The interview is going to give fruit, it is believed that this effect helps in learning.

4. Charmukhi Rudraksha              Four Face Rudraksha 
Mantra: = ॐ Hrim Namah
Four Faced  Rudraksha is considered as the form of Sakshat Brahma.
This Rudraksha helps in attaining Dharma, Artha, Kama, and Moksha.

5. Panchmukhi Rudraksha      Five Face Rudraksha 
Mantra: = OM Hrim Namah
A five-faced Rudraksha is a form of self-realization, giving liberation to all, fulfilling desires.

The Panchmukhi Rudraksha is believed to remove all sins.

6. Seh Mukhi Rudraksha                      Six Face Rudraksha 

Six Faced Rudraksha
Mantra: = OM

A person holding a six-faced Rudraksha is freed from the sin of killing Brahman,

It is considered to be the form of Rudraksha Kartikya.

7. Satmukhi Rudraksha                    Seven Face Rudraksha 

Seven Faced Rudraksha

Mantra: = Om Namah

The person wearing Satmukhi Rudraksha becomes opulent, Lakshmi is with this person. It helps in bringing fame.

8. Aath Mukhi Rudraksh:

Mantra: = Om Namah

The eight-faced Rudraksha is similar to the Bhairava form, aiding full life.

9. Nine Face Rudraksha

Nine Faced Rudraksha

Mantra: = M

Bhairava holding the nine-faced Rudraksha and is considered to be the symbol of Kapil Muni.

The person holding this gets the blessings of Maa Maheshwari.

10. Dasmukhi Rudraksha Ten Face 

Mantra: = OM

Ten Faced Rudraksha gets blessings of Lord Vishnu and wishes are fulfilled.

11. Syarah Mukhi Rudraksha   Eleven Face 

Mantra: = OM

Eleven-faced Rudraksha, victory is found everywhere.

It has been considered as Rudra form.

12. Barah Mukhi Rudraksha

Twelve Faced Rudraksha

Mantra: = OM Kraon Kshraun Rān Namah

The one holding it is as stunning as the Sun.

13. Thiru Mukhi Rudraksha     Thirteen Face Rudraksha

Mantra: = OM

Thirteen faced Rudraksha is considered to be the form of Lord Shiva in the country and abroad.

Wearing thiru mukhi rudraksh gives good luck.




14. Fourteen Faced Rudraksha


Mantra: = OM Namah

Fourteen-faced Rudraksha is the ultimate form, it is believed that if it is devoutly worn on the forehead then sins are destroyed.



Om Namah Shivaya: Om Namah Shivaya: Om Namah Shivaya:

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गुरुवार, 1 अक्तूबर 2020

Help Line Numbers

Helpline Phone Numbers 
Help Line Numbers
Help Line Numbers



112 = National Emergency Number

100 = Police

101 = Fire

102 = Ambulance 

108 = Disaster Management Service 

181 = Women Helpline Number (Domestic Abuse)

139 = Railway Query 


1094 = Missing Child and Women

1091 = Women Helpline 

1291 = Senior citizen Help Line Number

1097 = Aids Help-line 

1066 = Anti Poison

1072 = Railway Accident Emergency Service 

1073 = Road Accident Emergency Service 

1098 = Children in Difficult Situation 

1363 = Tourist Helpline Number 1800111363

1906 = LPG Leak Helpline 

1551 = Kisan Call Center  





गुरुवार, 10 सितंबर 2020

माँ दुर्गा पूजा और नवरात्री दुर्गा माँ की हिंदी कहानी

माँ दुर्गा पूजा और नवरात्री 2020 


Jai-Mata-Di
Jai-Mata-Di 

जय माँ,
माँ दुर्गा पूजा और नवरात्री 2020 


नवरात्रि (हिंदी: नवरात्रि, गुजराती: नवरात्रि) या शारदीय नवरात्रि पूरे उत्तरी और पूर्वी भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। 

नवरात्रि दसवें दिन अच्छे की जीत के साथ बुराई के खिलाफ अच्छाई की लड़ाई की नौ रातों का प्रतीकात्मक उत्सव है। इस अवधि के दौरान, माँ दुर्गा को शक्ति, ऊर्जा और ज्ञान के देवता के रूप में पूजा जाता है।

नवरात्रि 2020 की शुरुआत 17 अक्टूबर, शनिवार को होगी

23 अक्टूबर, शुक्रवार को सरस्वती विसर्जन के साथ नवरात्रि का समापन होता है। दसवां दिन दशहरा है, जो 25 अक्टूबर, रविवार को पड़ता है।

आमतौर पर नवरात्रि वर्ष में दो बार मनाई जाती है - एक बार वसंत के दौरान (चैत्र नवरात्रि) और एक बार शरद ऋतु (शरद नवरात्रि) के दौरान। ये दोनों समय चंद्र कैलेंडर के अनुसार ग्रहों के परिवर्तन के साक्षी हैं।

Jai-Mata-Di
Jai-Mata-Di 
शरद नवरात्रि 2020 या महा नवरात्रि आमतौर पर भारतीय महीने अश्विन के दौरान मनाया जाता है जो चंद्र पखवाड़े के पहले दिन से शुरू होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर के महीनों में आता है।

यह त्योहार नौ रातों के लिए मनाया जाता है और भक्त प्रार्थना करते हैं, डांडिया रास और गरबा में भाग लेते हैं और देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए प्रसाद चढ़ाते हैं।

नवरात्रि के छठे दिन से दुर्गा पूजा मनाई जाती है। यह 4 दिनों तक जारी रहेगा और फिर विजयदशमी के साथ समाप्त होगा।

जानिए यह सब: दुर्गा पूजा के पीछे की असली कहानी

नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत के पीछे अलग-अलग किस्से हैं।

राक्षसों के राजा महिषासुर ने स्वर्ग में देवताओं के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। उसका मुकाबला करने के लिए, शिव, ब्रह्मा और विष्णु की त्रिमूर्ति सहित सभी देवताओं ने अपनी दिव्य शक्तियों में शक्ति और 'शक्ति' की मां को जन्म देने के लिए पूल किया। 

इस प्रकार देवी दुर्गा का निर्माण हुआ और उन्होंने अपनी शक्ति और बुद्धिमत्ता के साथ महिषासुर को उसके खिलाफ नौ रातों की उग्र लड़ाई के बाद मार डाला। जीत का दसवां दिन इस प्रकार विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है - बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन।

और जानिए: मस्त डांडिया रास और गरबा नृत्य की ललित कला

लंका में अपनी कैद से सीता को बचाने के लिए भगवान राम रावण के खिलाफ युद्ध में उतरने वाले थे। युद्ध शुरू करने से पहले, राम ने देवी दुर्गा की पूजा की और उनका आशीर्वाद मांगा। 

पूजा के लिए उन्हें 108 कमलों की आवश्यकता थी। गिनती को पूरा करने के लिए, जब राम ने अपनी एक आंख को निकालने वाले थे, तो देवी दुर्गा उभरीं और उन्हें अपनी दिव्य 'शक्ति' का आशीर्वाद दिया। उस दिन राम ने युद्ध जीता।

उमा, हिमालय के राजा दक्ष की बेटी, कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान दस दिनों के लिए घर आती है। उमा ने भगवान शिव से शादी की और यह त्योहार उनके घर पृथ्वी पर आने का जश्न मनाता है।


माँ दुर्गा पूजा और नवरात्री 2020 

देवी दुर्गा के नौ अवतार

नौ रातों के लिए, लोग अत्यधिक भक्ति और प्रार्थना के साथ त्योहार मनाते हैं। प्रत्येक दिन दुर्गा माँ के एक अवतार को समर्पित है। इसके आधार पर, भक्तों को प्रत्येक दिन सही रंग पहनना पड़ता है। 

क्या आप जानते हैं कि प्रत्येक नवरात्रि की रात को क्या रंग पहनना है? जरा देखो तो!

दिन 1: शैलपुत्री / प्रतिपदा

प्रतिपदा पर, देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैला का अर्थ है पर्वत और पुत्री का अर्थ है बेटी। चूंकि देवी पार्वती पर्वत भगवान की बेटी हैं, इसलिए उन्हें इस दिन महत्व दिया जाता है।

दिन 2: ब्रह्मचारिणी / द्वारिका

द्वारिका पर, देवी ब्रह्मचारिणी दुर्गा देवी का एक रूप हैं और वह क्रोध को कम करने वाली हैं। इसलिए, दूसरा दिन इस देवी के लिए समर्पित है।

दिन 3Oct 19, सोमवार

चूंकि रंग व्हि शांति और सद्भाव का प्रतीक है, इसलिए यह किसी के जीवन में बहुत महत्व रखता है। सफेद रंग को नवरात्रि के दिन 3 की आवश्यकता है। 
इस रंग को पहनने से भक्त को अपने जीवन में सुरक्षा, खुशी और विचार की पवित्रता का अहसास होगा।

दिन 4Oct 20, मंगलवार

लाल एक शक्तिशाली रंग है जो प्यार, जुनून और बहादुरी की भावना को दर्शाता है। नवरात्रि के 4 दिन, अगर लाल पहना जाता है, 
तो यह पूरे वर्ष के लिए हिंदू भक्तों को जीवन शक्ति, वफादारी और सुंदरता के साथ आशीर्वाद देने में मदद करता है।

दिन 5Oct 21, बुधवार

नवरात्रि के 5 दिन, शाही नीले कुर्ते, स्कर्ट और साड़ी पहनकर उत्सव के समय में भव्यता और रॉयल्टी लाने के लिए। रॉयल ब्लू एक बेजोड़ करिश्मे का संकेत देता है, 

और जो भी आप जीवन में लक्ष्य करते हैं, उसमें उत्कृष्टता प्राप्त करने का जुनून।

दिन 6 Oct 22, गुरुवार

नवरात्रि के दिन 6 पर पीले रंग के कपड़े पहनें, जो किसी के जीवन में खुशी, सकारात्मकता के साथ समृद्ध हो। चूंकि यह रंग गर्मी और खुशी का प्रतीक है, 

यह निश्चित रूप से व्यक्ति को विशेष दिन और पूरे वर्ष के लिए शांत ड्यूरिनफ महसूस करवाएगा।

दिन 7 रात 23, शुक्रवार

रंग हरा का अर्थ है उर्वरता, एक सकारात्मक विकास, शांति और शांति। तो, इस 2020, आपको नवरात्रि के दिन 7 पर हरे रंग की पोशाक पहनने की आवश्यकता है। 

यह एक भक्त के जीवन में नई शुभ शुरुआत का संकेत देता है। देवी को अपने जीवन में शांति लाने दें।

दिन 8 रात 24, शनिवार

रंग मोर का रंग व्यक्ति और बुद्धि को दर्शाता है। नवरात्रि के 8 दिन शांति, अद्वितीयता, और साथी के प्रति दया के गुणों से धन्य पाने के लिए मोर हरे रंग का वस्त्र पहनें। 

चूंकि यह हरे और नीले रंग का मिश्रित रंग है, यह भक्त को दोनों रंगों का लाभ प्राप्त करने में मदद करता है।

दिन 9Oct 25, रविवार

बैंगनी रंग शांति और कुलीनता का प्रतीक है। नवरात्रि के 9 दिन, बैंगनी रंग की छाया पहनें और समृद्धि और समृद्धि के साथ संपन्न हो जाएं। यह एक अच्छा रंग है 

जो दुर्गा देवी को सही तरीके से खुश करने में मदद करता है।

माँ दुर्गा पूजा और नवरात्री 2020 

जय माँ 

 

शिव का सावन 
राशि 
रुद्राक्ष की पूरी जानकारी और उपयोग


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गुरुवार, 3 सितंबर 2020

Happy Teachers' day 2020 | 25 wishes to send teachers via SMS, What'sup, FaceBook Twitter

Happy Teachers' day 2020 

25 wishes to send teachers via SMS, What's up, Facebook Twitter

हिंदी में. 



हैप्पी टीचर्स डे 2020 ।  25 शुभकामनाएँ भेजे अपने अध्यापक को वाया SMS, Facebook , Whatup से  

शिक्षक दिवस शिक्षकों की सराहना के लिए एक विशेष दिन है, और किसी विशेष क्षेत्र या सामान्य रूप से समुदाय में उनके विशेष योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करने के लिए समारोह में शामिल हो सकते हैं।

भारत के दूसरे राष्ट्रपति, सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को हुआ था। इस दिन को 1962 से शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। इस दिन, शिक्षक और छात्र हमेशा की तरह स्कूल को रिपोर्ट करते हैं लेकिन सामान्य गतिविधियों और कक्षाओं को गतिविधियों द्वारा बदल दिया जाता है। उत्सव, धन्यवाद और स्मरण। कुछ स्कूलों में, शिक्षकों के लिए अपनी प्रशंसा दिखाने के लिए वरिष्ठ छात्र शिक्षण की जिम्मेदारी लेते हैं।

दुनिया भर में शिक्षकों और छात्रों का एक अनूठा बंधन है। शिक्षक दिवस पर, छात्र उन्हें भावनात्मक संदेश भेजते हैं और उन पर विश्वास करने और हमें कठिन समय में मार्गदर्शन करने के लिए धन्यवाद देते हैं। एक शिक्षक या एक संरक्षक स्कूल और कॉलेज तक सीमित नहीं हो सकता है। कोई भी व्यक्ति वह व्यक्ति हो सकता है जिसे हम एक रोल मॉडल के रूप में देख सकते हैं।

हैप्पी टीचर्स डे 2020: यहां 25 इच्छाएं हैं जो छात्र एसएमएस, व्हाट्सएप के माध्यम से अपने शिक्षकों को भेज सकते हैं:

मैं अपने दोस्त और मार्गदर्शक होने के लिए आपको पर्याप्त धन्यवाद नहीं दे सकता। हैप्पी टीचर्स डे 2020!

आज मैं जो कुछ भी हूं तुम्हारी वजह से हूं, प्रिय मैम। आपको लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना। हैप्पी टीचर्स डे 2020!

आपने मुझे जीवन में बड़े सपने देखना सिखाया है। मैं आपका बहुत आभारी हूं। हैप्पी टीचर्स डे 2020!

आपके धैर्य और देखभाल के बिना मैं इसे नहीं बना सकता था। आपको अच्छे स्वास्थ्य और खुशी की शुभकामनाएं। हैप्पी टीचर्स डे 2020!

महोदय, आपने मुझे हर कदम पर प्रोत्साहित किया है और मेरे समर्थन का सबसे मजबूत स्तंभ है। हरचीज के लिए धन्यवाद। अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

यह आपकी वजह से है कि मैं आज एक मजबूत और आत्मविश्वासी व्यक्ति हूं। मैं आपका बहुत सम्मान करता हूँ! अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

आप अब तक के सबसे प्यारे शिक्षक हैं। मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है! अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

मैं आपको जीवन में अपने शिक्षक के रूप में पाकर बेहद भाग्यशाली हूं। मैं आपकी कोमल मुस्कान को कभी नहीं भूलूंगा! हैप्पी टीचर्स डे 2020!

जो चीज आपको खास बनाती है, वह है आपका मुझ पर अटूट विश्वास। यह मुझ पर आपके भरोसे के कारण है कि मैं एक काबिल इंसान बनने के लिए बड़ा हुआ हूं। हैप्पी टीचर्स डे 2020!

आपको बहुत-बहुत मुबारक शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि आप स्वस्थ और खुश रहें! अपने दिन का आनंद लें!

आपको बहुत सारी शुभकामनाएं, आप एक अद्भुत शिक्षक हैं। अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

प्रिय महोदय, आप मेरी प्रेरणा हैं और मैंने आपसे बहुत कुछ सीखा है। अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

प्रिय शिक्षक, आप मेरे जीवन में एक आशीर्वाद हैं। मैं तुम्हारे बिना क्या करूँगा। धन्यवाद! अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

आपके जैसे शिक्षकों की वजह से दुनिया बेहतर जगह है। हैप्पी टीचर्स डे 2020!

आप जैसा बेहतरीन शिक्षक सबसे अच्छा हकदार है। मैं आपको ढेर सारी खुशियाँ देना चाहता हूँ! एक महान शिक्षक दिवस है!

जब मैंने गलतियाँ कीं तो कोई भी अधिक दयालु और धैर्यवान नहीं हो सकता था। बहुत बहुत धन्यवाद मैडम। अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

मैं आपका छात्र होने के लिए बहुत भाग्यशाली हूं। मैं तुम्हें बहुत प्रिय शिक्षक प्यार करता हूँ! आपको एक महान शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं!

आपको खुशी और खुशी की शुभकामनाएं, आप एक अद्भुत शिक्षक हैं। हार्दिक आभार!

एक बहुत ही खास शिक्षक को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ!

प्रिय महोदय, आप मेरे लिए सीखने को मजेदार बनाते हैं। मैं हमेशा तुम्हें देखने के लिए तत्पर हूं। अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

मेरे पास आभार व्यक्त करने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं हैं! आप सिर्फ मेरे शिक्षक नहीं बल्कि मेरे सबसे अच्छे दोस्त थे। अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

शिक्षक दिवस पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ। शानदार दिन है साहब!

यह आपके लगातार प्रयासों के कारण है कि मैंने परीक्षा में टॉप किया है। आपको बहुत - बहुत धन्यवाद! अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

आपको मेरे शिक्षक के रूप में देखना अद्भुत था। मुझे वास्तव में आपकी कक्षाएं याद आती हैं। अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं!

प्रवेश करते ही कक्षा रोशनी करती है। 



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गुरुवार, 27 अगस्त 2020

अमावस्या तिथि, समय, अनुष्ठान और महत्व




अमावस्या तिथि, समय, अनुष्ठान और महत्व



अमावस्या तिथि, समय, अनुष्ठान और महत्व
अमावस्या तिथि, समय, अनुष्ठान और महत्व


 अमावस्या तिथि, समय, अनुष्ठान और महत्व पितृ मोक्ष

महालया अमावस्या, जिसे सर्वप्रीति अमावस्या भी कहा जाता है, पितृ मोक्ष अमावस्या या पितृ अमावस्या एक हिंदू परंपरा है जो पितरों ’या पूर्वजों को समर्पित है। यह दक्षिण भारत में अमावसंत कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह के अमावस्या (अमावस्या तिथि) को मनाया जाता है।

उत्तर भारत में जहां पूर्णिमांत कैलेंडर का उपयोग किया जाता है, वह 'अश्विन' के महीने में और ग्रेगोरियन कैलेंडर में सितंबर-अक्टूबर के महीनों के दौरान आता है। महालया अमावस्या 15 दिवसीय लंबे श्राद्ध अनुष्ठान का अंतिम दिन है। इस दिन को सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन किसी भी मृत व्यक्ति का श्राद्ध अनुष्ठान किया जा सकता है, भले ही वह तीथि के बावजूद हो।

17 सितंबर, गुरुवार को महालया अमावस्या 2020 है

हिंदी कहनी के तरह समाजज़ते है 21 दिन, महालया अमावस्या थारपनम या तर्पण और अनुष्ठान पूर्वजों के आशीर्वाद को प्राप्त करने और शांतिपूर्ण और समृद्ध जीवन के लिए उनका आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है। महालया अमावस्या पितृ पक्ष, पितरों के पखवाड़े ’के अंतिम दिन मनाया जाता है और इस अवधि का सबसे महत्वपूर्ण दिन भी है। बंगाल में इसे 'महालया' के रूप में देखा जाता है जो भव्य दुर्गा पूजा समारोहों की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन पृथ्वी पर देवी दुर्गा के वंश का भी प्रतीक है। यह दिन पूर्वजों के प्रति अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्मान देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। महालया अमावस्या पर तेलंगाना राज्य में बाथुकम्मा उत्सव की शुरुआत होती है।

महालया अमावस्या के दौरान अनुष्ठान:
इस दिन, मृतक परिवार के सदस्यों के लिए तर्पण और श्राद्ध अनुष्ठान मनाया जाता है, जिनकी मृत्यु 'चतुर्दशी', 'अमावस्या' या 'पूर्णिमा' तीथि को हुई थी।
पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन, प्रेक्षक सुबह जल्दी उठता है और सुबह की रस्में पूरी करता है। वे इस दिन पीले कपड़े पहनते हैं और अपने घर एक ब्राह्मण को आमंत्रित करते हैं। श्राद्ध समारोह परिवार में सबसे बड़े पुरुष द्वारा मनाया जाता है।
जैसे ही ब्राह्मण आता है, अनुष्ठान के पर्यवेक्षक उनके पैर धोते हैं और उन्हें बैठने के लिए एक स्वच्छ स्थान प्रदान करते हैं। हिंदू शास्त्रों में बैठने की विशिष्ट दिशा है। देव पक्ष ब्राह्मण पूर्व की ओर मुख किए हुए बैठे हैं, जबकि पितृ पक्ष और मातृ पक्ष ब्राह्मण उत्तरी दिशा की ओर मुख किए हुए बैठे हैं।
महालया अमावस्या पर पितरों या 'पितरों' की पूजा धूप, दीया और फूलों से की जाती है। पुरखों को खुश करने के लिए पानी और जौ का मिश्रण भी चढ़ाया जाता है। एक पवित्र धागा दाहिने कंधे पर पहना जाता है और दान के रूप में एक छींटा दिया जाता है। इस आयोजन के लिए विशेष भोजन तैयार किया जाता है और पूजा अर्चना के बाद ब्राह्मणों को चढ़ाया जाता है। जिस स्थान पर ब्राह्मणों को बैठाया जाता है, वहां तिल के बीज भी छिड़क दिए जाते हैं।
यह दिन पूर्वजों के सम्मान में मनाया जाता है और परिवार के सदस्य उनकी याद में दिन बिताते हैं। पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंत्रों का पाठ किया जाता है। इस दिन, लोग अपने पूर्वजों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने उनके जीवन के लिए योगदान दिया है। वे अपने पूर्वजों से माफी भी मांगते हैं और प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्माएं शांति से रहें।
महालया अमावस्या सूर्योदय पर महत्वपूर्ण समय  17 सितंबर, 2020 6:17 पूर्वाह्न सूर्यास्त 17 सितंबर, 2020 6:24 बजे, अमावस्या तीथि 16 सितंबर, 2020 7:57 अपराह्न अमावस्या तीथि 
17 सितंबर, 2020 4:30 अपराह्न काल काल 17 सितंबर को समाप्त हो रहा है। 1:33 PM - 
17 सितंबर, 3:59 PM कुतुप मुहूर्त 17 सितंबर, 11:57 AM - 17 सितंबर, 12:45 PM 
रोहिना मुहूर्त 17 सितंबर, 12:45 PM - 17 सितंबर, 1:33 PM

पूर्वजों के लिए महालया अमावस्या समर्पण का महत्व:
आशीर्वाद, कल्याण और समृद्धि प्राप्त करने के लिए महालया अमावस्या का अनुष्ठान किया जाता है। इस अनुष्ठान के पर्यवेक्षक को भगवान यम से भी आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके परिवार सभी बुराइयों से सुरक्षित रहते हैं।

हिंदू धर्मग्रंथों में यह बात सामने आई है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पितरों के श्राद्ध के पहले 15 दिनों में श्राद्ध करने में विफल रहता है या मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, तो उनकी ओर से 'तर्पण' सर्वपाप मोक्ष के दिन मनाया जा सकता है। अमावस्या '। महालया अमावस्या के दिन, यह माना जाता है कि पूर्वज और पूर्वज उनके घर जाते हैं और यदि उनकी ओर से उनके श्राद्ध अनुष्ठान नहीं किए जाते हैं, तो वे अप्रसन्न होकर लौटते हैं।

ज्योतिष विज्ञान में यह उल्लेख है कि यदि पूर्वज कोई गलती करते हैं, तो यह उनके बच्चों की कुंडली में 'पितृ दोष' के रूप में परिलक्षित होता है। परिणामस्वरूप वे अपने जीवन में बुरे अनुभवों से पीड़ित होते हैं। इन पूर्वजों की आत्माएं मोक्ष प्राप्त नहीं करती हैं और इसलिए शांति की तलाश में भटकती हैं।

हालाँकि महालया अमावस्या पर श्राद्ध अनुष्ठान करने से, इस 'पितृ दोष' को हटाया जा सकता है और मृतक आत्मा को मोक्ष भी प्रदान किया जा सकता है। पूर्वज बदले में अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं और उन्हें जीवन में सभी खुशियां देते हैं। पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन किए जाने वाले श्राद्ध अनुष्ठान को पवित्र और शांतिपूर्ण माना जाता है, जो कि पवित्र संस्कार के लिए जाना जाने वाला पवित्र शहर गया में मनाया जाता है।

Tarpan-Diya
तर्पण दिया 




बुधवार, 26 अगस्त 2020

रविवार, 23 अगस्त 2020

Lord Ganesha born

Ganesh Chaturthi 2020: It is celebrated every year across the country with full enthusiasm. The festival marks the birth of Lord Ganesha. Let us have a look in detail about the festival Ganesh Chaturthi and its celebration.

Ganesh Chaturthi 2020: It is a ten-day festival that marks the birth anniversary of Lord Ganesha. He is considered as the God of wisdom, prosperity, and good fortune. In fact, he is the God of new beginnings and a fresh start. 

It is believed that Lord Ganesha was born during Shukla Paksha of Bhadrapada month. Therefore, it begins on the fourth day (Chaturthi) of the month of Bhadrapada (August-September) that is the sixth month of the Hindu calendar. This year it will begin on 22 August, 2020. 

Amongst the other 108 names, Lord Ganesha is also called as Ganesh, Gajadant, Gajanana, etc.  

About Ganesh Chaturthi 
The festival begins on the fourth day (Chaturthi) of the month of Bhadrapada (August-September) that is the sixth month of the Hindu calendar. This year it will begin on 22 August, 2020. 

And the festival or Ganeshotsav ends after 10 days on Anant Chaturdashi which is also known as Ganesh Visarjan day. Devotees immerse the idol of Lord Ganesha in the water body after a gala street procession on Anant Chaturdashi. 

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About Ganapati Sthapana and Ganapati Puja Muhurat
The puja of Lord Ganesha is preferred during Madhyahna. It is believed that Lord Ganesh was born during Madhyahna Kala which is equivalent to midday according to the Hindu division of the day. However, on Ganesh Chaturthi, Ganapati Sthapna and Ganapati Puja are done during Madhyahna part of the day. 

On this day during midday devotees of Ganesha perform detailed ritualistic Ganesha Puja which is known as Shodashopachara Ganapati Puja.

Ganesh Chaturthi: History
The legend goes like Goddess Parvati with the use of clay made baby Ganesha and had breathed life into the idol. She asked him to guard the entrance while she was in the bath. He was instructed not to allow anyone to enter, no matter who they were. However, when Lord Shiva wanted to enter the premises, baby Ganesha stopped him for the same. Lord Shiva tried but all his attempts to meet his wife Durga failed. Then, Lord Shiva sent his army that Ganesha vanquished in no time. This enraged Lord Shiva and fought with the little baby Ganesha himself. He severed the head of the baby Ganesha from his body. When Goddess Parvati came to realise this fact, her heart was broken. She threatened to unleash hell on earth and end-all of humanity. Lord Shiva tried to give a reason but nothing works and so he promised her to bring baby Ganesha back to life. 

Lord Shiva instructed his followers to search the head of the first living creature that they notice on their way so that they could replace it on Ganesha's body. Further, Lord Shiva's followers or Ganas came back with the head of a baby elephant. And like this Lord Ganesha came back to life. Lord Ganesha was named as the leader of the Ganas as Ganapati by Lord Shiva.

Ganesh Chaturthi: Celebrations
The festival is celebrated for 10 days. Various people bring the idol of Lord Ganesha either at home, office spaces, or local area pandals. People used to decorate the space for Lord Ganesha and place offerings in front of the Lord Ganesha. Such offerings include modak, payasam, coconut rice, motichoor laddoo, shrikhand, and several other sweets. 

During these ten days, devotees visit pandals, temples, worship Lord Ganesha, pray respect, and offer prayers. 

On Ganapati Visarjan, the idols of Lord Ganesha are immersed in water. Devotees chant 'Ganpati Bappa Morya' pay respect to Lord Ganesha as they give farewell to him. 

It is also believed that Lord Ganesha takes away all our worries and leave his blessings behind. But this year due to the pandemic the celebration will be different. 

Important Days and Dates in August 2020.